राफ़ेल मुद्दे पर घिरती सरकार - #सिफ़र

राफ़ेल डील  पर सरकार अब मुसीबत में पड़ती नज़र आ रही है।  पहले जहाँ सरकार रिलायंस को फायदा पहुंचने के आरोपों को विपक्ष की चाल बता रही थी वहीँ अब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांकोइस ओलांदे ने अपने एक बयान में कहा की राफ़ेल डील में खुद सरकार की और से अनिल अम्बानी की कंपनी रिलायंस के नाम का प्रस्ताव दिया गया था और उन्हें उसके अलावा कोई और विकल्प नहीं दिया गया था।  

 राफ़ेल डील को लेकर पहले ही काफी विवाद था जिसमे विमान की कई गुना ज़्यादा क़ीमत और देश की नवरत्न कंपनी एच.ए.एल. जिसे विमान बनाने का अनुभव है उसे दरकिनार करते हुए कुछ हफ्ते पहले बनाई गई अनिल अम्बानी की कंपनी को देना शामिल था, और अब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांकोइस ओलांदे के बयान के बाद सभी आरोपों को और बल मिला है।  सरकार की और से वित्त मंत्री अरुण जेटली काफी वक़्त से ब्लोग लिखकर सफाई पेश करने में जुटे हैं लेकिन वो अपने ब्लॉग में सीधी बात कहने के बजाये विपक्ष को झूठा बताने पर ज़्यादा ज़ोर दे रहे हैं।  अरुण जेटली पहले ही भगोड़े उद्योगपति विजय माल्या के देश छोड़ने से पहले उससे हुई मुलाक़ात को लेकर विवादों में हैं।  दूसरी और प्रधानमंत्री अन्य मुद्दों की तरह इस मुद्दे पर खामोश नज़र आ रहे हैं।  प्रधानमंत्री को इस मुद्दे पर देश की जवाब देना चाहिए।  देश को बताना होगा की इस डील में उनकी और उनकी सरकार की क्या भूमिका है ?  
शहाब ख़ान 'सिफ़र'


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