Taj-ul-Masajid - ताजुल मसाजिद


Taj-ul-Masajid -  Art By Shahab Khan



भोपाल की ताजुल मसाजिद एशिया की छठी सबसे बड़ी मस्जिद है लेकिन यदि क्षेत्रफल के लिहाज से देखें और इसके मूल नक्शे  के हिसाब से वुजू के लिए बने  मोतिया तालाब को भी इसमें शामिल कर लें तो बक़ौल इतिहासकार अख्तर हुसैन साहब के यह दुनिया की सबसे बड़ी मस्जिद होगी ।

ताजुल मसाजिद के मायने है 'मस्जिदों का ताज'। बेगम सिकन्दर जहां ने इस मस्जिद को तामीर करवाने का ख़्वाब  देखा था ।   उन्होने ध्वनि तरंग के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए 21 खाली गुब्बदों की एक ऐसी संरचना का मॉडल तैयार करवाया कि जब मुख्य गुंबद के नीचे खडे होकर जब ईमाम कुछ कहें तो  आवाज़ पूरी मस्जिद में गूँजे।  

ताजुल मसाजिद को मुकम्मल करने बेगम शाहजहाँ का ख्वाब अधूरा ही रह गया क्योंकि कैंसर की वजह से उनका इंतेखाल हो   गया। इसके बाद बेगम सुल्तानजहाँ और उनके बेटे  भी इस मस्जिद का काम पूरा नहीं करवा सके ।  ताजुल मसाजिद को मुकम्मल करने का ज़िम्मा हज़रात मौलाना मुहम्मद इमरान ख़ान साहब ने लिया और उनकी मेहनत और कोशिश से 1970 में ताजुल मसाजिद मुकम्मल बनकर तैयार हुई। आज ताजुल मसाजिद एशिया की छठी सबसे बड़ी और हिंदुस्तान की सबसे बड़ी मस्जिद है।

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