चायनीज़ प्रोडक्ट के बायकॉट का ढोंग और हक़ीक़त #सिफ़र

देश में समय-समय पर चायनीज़ प्रॉडक्ट के बायकॉट की मांग उठती रहती है। कुछ संगठनों द्वारा कई बार देश में चायनीज़ मोबाइल के शोरूम और दुकानों में तोड़फोड़ भी की गई है। अक्सर होली, दिवाली और नए साल के मौक़े पर चाइनीज़ पिचकारी, पटाखों और लाइटों का विरोध होना शुरू हो जाता है। चायनीज़ सामान को जलाया जाता है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र परिषद् में आतंकवादी मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव पर चीन ने वीटो द्वारा विरोध करके प्रस्ताव को परित होने से रोक दिया उसके बाद से ही देश में चायनीज़ प्रॉडक्ट के बायकॉट की मांग फिर से उठने लगी है। चायनीज़ प्रॉडक्ट के बायकॉट के लिए अक्सर जनता को कहा जाता है लेकिन कभी भी सरकार द्वारा बायकॉट की बात नहीं की जाती।  चीन  के मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के विरोध पर न ही तो प्रधानमंत्री ने और नहीं सरकार के किसी भी मंत्री और बीजेपी प्रवक्ता ने चायनीज़ प्रॉडक्ट के बायकॉट और विरोध की बात नहीं कही। 



चायनीज़ प्रॉडक्ट के बायकॉट लिए हमेशा जनता से ही क्यों कहा जाता है ? सरकार खुद इस पर कोई नीति स्पष्ट क्यों नहीं करती है ? सवाल यह भी है उठता है की आखिर चायनीज़ प्रॉडक्ट देश में आते कैसे हैं ऐसा तो नहीं की ठेले में सामान रखकर फेरी लगाते हुए चायनीज़ व्यापारी भारत में आ जाते होंगे या फिर अवैध तस्करी द्वारा भारत में लाया जाता है ? ज़ाहिर ऐसा नहीं है चाइनीज़ कंपनियों को सरकार द्वारा देश में व्यापार करने की अनुमति दी जाती है जिसके बदले सरकार को विभिन्न शुल्कों के रूप में बड़ी रकम की आमदनी होती है। सरकार चाइनीज़ कंपनियों को आसानी से देश में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने और अपने प्रॉडक्ट बेचने के लिए लाइसेंस जारी कर देती है। देश में  MI (XIOMI), OPPO, VIVO मोबाइल कंपनियों के प्लांट चल रहे हैं।चायनीज़ कंपनी MI (XIOMI) ने भारत में पेमेंट एप्प MI Pay भी लांच कर दिया है।  जो की UPI बेस्ड पेमेंट सर्विस है जिसे नेशनल पेमेंट्स कारपोरेशन (NPCI) द्वारा एप्रूव्ड किया जा चूका है। पिछले साल प्रधानमंत्री खुद चीन  जाकर वहां के राष्ट्रपति से मिलते हैं, साथ में झूला झूलते हैं, मीडिया में मोदी जिनपिंग की शानदार केमिस्ट्री की बात की होती है। मीडिया में प्रधानमंत्री के चीन दौरे को एक बड़ी कामयाबी के रूप में दिखाया जाता है।

पिछले साल 2018 में रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया ने मुंबई में बैंक ऑफ़ चायना की ब्रांच खोलने के लिए अनुमति दे चुकी है, ज़ाहिर है आगे देश के अन्य शहरों में भी बैंक ऑफ़ चायना की ब्रांच खोलने की अनुमति भी मिल ही जाएगी। 19 मार्च 2019 को स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ने व्यापार अवसरों को बढ़ावा देने के लिए बैंक ऑफ चाइना के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका मकसद दोनों बैंकों के बीच व्यापार में तालमेल बढ़ाना है। भारत में सार्वजानिक क्षेत्र के सबसे बड़े बैंक द्वारा बैंक ऑफ़ चायना के साथ समझौता किया जा रहा है और जनता से चायनीज़ प्रॉडक्ट का बायकॉट करने को कहा जा रहा है। भारतीय क्रिकेट टीम की स्पांसर एक चायनीज़ मोबाइल कंपनी है।  बॉलीवुड, टीवी और स्पोर्ट्स सेलेब्रिटी करोड़ों रुपये लेकर चायनीज़ कंपनियों के लिए विज्ञापन में नज़र आ रहे हैं। आईपीएल की स्पांसर भी एक चायनीज़ कंपनी है। टीवी चैनलों पर आने वाले अनेक प्रोग्रामों के स्पांसर विभिन चायनीज़ कम्पनियाँ ही हैं।  अक्सर जब न्यूज़ में चायनीज़ प्रॉडक्ट के बॉयकॉट पर डिबेट चलती है तो बीच-बीच में चायनीज़ प्रॉडक्ट के विज्ञापन भी दीखते हैं।  ऊपर चायनीज़ प्रॉडक्ट के बॉयकॉट की पट्टी लगी लगी होती है और नीचे की पट्टी में में चायनीज़ मोबाइल का विज्ञापन भी दिखाई  देता है।  


सवाल ये उठता है की सरकार खुद चायनीज़ प्रोडक्ट को देश में बैन क्यों नहीं करती। कुछ लोग इस पर तर्क देते हैं विभिन्न नीतियों के कारण सरकार बैन नहीं कर सकती जनता को खुद से आगे आकर विरोध करना चाहिए। ये तर्क वैसा ही की सरकार सिगरेट, तम्बाकू, बीड़ी के पैकेट पर कैंसर की चेतावनी लिखवाकर अपनी ज़िम्मेदारी पूरी समझ ली जाती है और राजस्व के रूप में बड़ी रक़म प्राप्त कर लोगों से कहा जाता है की हमने तो चेतवानी लिखवा दी है अब आप जानो।  

अब मान लीजिये की जनता पूरी तरह से चायनीज़ प्रोडक्ट का बायकॉट करना शुरू कर दे तो उसका क्या असर पड़ेगा। सबसे पहली बात तो यह की वर्तमान स्थिति में चायनीज़ प्रोडक्ट का 100% बायकॉट करना तो संभव ही नहीं है क्योंकि भारत में बनने वाले लगभग सभी इलेक्ट्रॉनिक प्रॉडक्ट में इस्तेमाल होने वाला रॉ मटेरियल चायनीज़ ही होता है। अब मान ले की 100% न सही जितना हो सके उतना बॉयकॉट कर लिया जाये तो क्या स्थिति होगी ? हम जानते हैं की चायनीज़ प्रॉडक्ट की क़ीमत काफी कम होती है जो की एक ग़रीब और आर्थिक रूप से कमज़ोर व्यक्ति अदा कर सकता है, अगर वही प्रोडक्ट किसी बड़ी कंपनी का होगा तो उसे खरीदने का सोच भी नहीं सकता।  

एक स्थिति और समझिये की देश में एक छोटा व्यापारी या फुटपाथ पर दूकान लगाने वाले व्यक्ति ने थोक में चायनीज़ प्रॉडक्ट ख़रीद लिए हैं ताकि त्योहारों पर पर उसे बेचकर कुछ मुनाफ़ा कमा सके। अब अगर ऐसे में बॉयकॉट कर दिया जाये तो उसमे नुकसान तो उस फुटपाथ पर दूकान लगाने वाले छोटे दुकानदार का है, क्योंकि वो पहले ही अपनी जेब से उस सामान की क़ीमत दे चूका है।  इस तरह के बॉयकॉट से चायनीज़  अर्थव्यवस्था को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ने वाला।  इससे सिर्फ हमारे ही देश के छोटे दुकानदारों और व्यापारियों का नुकसान होगा। चायनीज़ पिचकारी, पटाखे और अन्य छोटे-मोटे सामन का बायकॉट करके चायनीज़ अर्थव्यवस्ता को चौपट किया जा सकता है ये सोचना सिर्फ बेवकूफ़ी ही है। 

संयुक्त राष्ट्र परिषद् में आतंकवादी मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करने के प्रस्ताव पर चीन का वीटो के इस्तेमाल से प्रस्ताव को पारित न होने देने पर चायना की आलोचना होना ही चाहिए लेकिन सिर्फ़ चायनीज़ प्रॉडक्ट का बायकॉट करने से कुछ फायदा नहीं होगा बल्कि ये काम सरकार का है कि वो कूटनीति द्वारा विभिन्न देशों के सहयोग से चीन पर दबाव बनाये ताकि चीन दुबारा ऐसा नहीं कर सके लेकिन हक़ीक़त यह है कि चीन के इस ग़लत क़दम पर सरकार द्वारा आलोचना तक नहीं की गई। अगर चाइना का बायकॉट करना ही है तो सरकार को अपनी नीति स्पष्ट करना चाहिए। अगर चायनीज़ प्रॉडक्ट का बॉयकॉट करना है तो सरकार को देश में निर्मित वस्तुओं पर लगने वाले विभिन्न शुल्कों में कटौती करना चाहिए ताकि उनकी क़ीमत में कमी हो और देश के ग़रीब और मध्यमवर्गीय लोगों के बजट में आ सकें। और अगर सरकार ऐसा नहीं कर सकती तो लोगों को चायनीज़ प्रॉडक्ट के बॉयकॉट की नौटंकी बंद कर देना चाहिए।  

 ✍  शहाब ख़ान  ''सिफ़र''

No comments