इब्तिदा-ए-सफ़र में लड़खड़ाता क्यों है ? #सिफ़र

इब्तिदा-ए-सफ़र में लड़खड़ाता क्यों है ?
अभी तो सफ़र तवील है घबराता क्यों है ?
हौसला रख आगे बढ़ गिर जाता क्यों है ?
रास्ते की मुश्किलों से डर जाता क्यों है ?
मंज़िल तेरी मुंतज़िर हिम्मत हार जाता क्यों है ?
 
 ✍  शहाब ख़ान  ''सिफ़र''
 
 
 
 

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