नन्हे पर्यावरण रक्षक (कहानी) #सिफ़र #Sifar

सोनू, नीता और राहुल दसवीं क्लास में पड़ते हैं।  तीनों एक ही कॉलोनी में पड़ोस में रहते हैं।  तीनोंआपस में बहुत अच्छे दोस्त हैं।  स्कूल जाना, पढ़ाई करना, खेलना सब साथ ही करते हैं।  आजकल गर्मियों की छुट्टियां चल रही हैं इसलिए दिन का अधिकतर वक़्त साथ ही गुज़रता है।   कॉलोनी में एक छोटा सा मैदान हैं तीनों वहीँ कॉलोनी के अन्य बच्चों के साथ खेलते हैं।  मैदान में एक नीम का पेड़ है, पूरी कॉलोनी में बस यही एक पेड़ बाक़ी है।  बच्चों ने जब से स्कूल में पर्यावरण संरक्षण के बारे में जाना तब से पर्यावरण संरक्षण के लिए काफी जागरूक हो गए हैं, उन्होंने मैदान बहुत से पौधे लगाए हैं और मिलकर उन पौधों और नीम के पेड़ की देखभाल करते हैं।  उन्हें नीम के पेड़ और पौधों से बहुत लगाव है।

पर्यावरण

कॉलोनी के क्षेत्र में म्युनिसिपल कारपोरेशन का नया जोन ऑफिस बनना है, इसके लिए अधिकारी जगह का चयन कर रहे हैं।  अधिकारी कॉलोनी के मैदान को जोन ऑफिस के लिए सही जगह मानकर उसका चयन कर लेते हैं।  कुछ दिन बाद वहां म्युनिसिपल कारपोरेशन के जोन ऑफिस का बोर्ड लगा दिया जाता है, और कुछ ही दिन बाद स्थानीय नेता जोन ऑफिस के निर्माण के लिए भूमिपूजन भी कर देते हैं। म्युनिसिपल कारपोरेशन के इंजीनियर अधिकरियों के साथ आते हैं और कहते हैं ऑफिस बनाने के लिए नीम के पेड़ और बाक़ी पौधों को को वहां से हटाना होगा, पेड़ को मैदान से हटाकर शहर में कहीं और शिफ्ट करने के बात करते हैं ।  सोनू, नीता और राहुल उस वक़्त वहीँ खेल रहे होते हैं। पेड़ हटाने की बात सुनकर तीनों हैरान  हो जाते हैं।  तीनों अधिकारीयों के पास आते हैं और सबसे पहले नीता बोलती हैं ''अंकल प्लीज पेड़ को यहाँ से मत हटवाइये, पूरी कॉलोनी में बस यही एक पेड़ बचा है'' फिर राहुल भी उसकी हाँ में हाँ मिलते हुए कहता ''अंकल प्लीज आप ऑफिस कहीं और बना लीजिये, यहाँ के पेड़ों से हमें बहुत प्यार हैं हम बहुत मेहनत और प्यार से इनकी देखभाल करते हैं, आप प्लीज इन्हे यहाँ से मत हटाइये'' अधिकारी उनकी बात सुनकर कहते हैं ''बच्चों ये जगह जोन ऑफिस के लिए आरक्षित की गई है, और पेड़ को काट नहीं रहे बल्कि उसे हम यहाँ से दूसरी जगह शिफ्ट कर देंगे'' तीनों बच्चे अधिकारीयों से बहुत मिन्नत करते हैं लेकिन वो कहते हैं ''हमारे पास ऊपर से आदेश आया है हम  इसमें कुछ नहीं कर सकते, थोड़े दिनों में पेड़ यहाँ से शिफ्ट हो जाएगा फिर जोन ऑफिस के लिए कंस्ट्रक्शन वर्क शुरू हो जायेगा'' बच्चे उनकी बात उदास होकर घर लोट जाते हैं।


बच्चे घर आकर ये बात अपने अपने माता-पिता को बताते हैं, बच्चों के माता-पिता कहते हैं ''ये सरकारी काम है हम इसमें क्या कर सकते हैं, तुम लोग उदास मत हो अब जो होना है वो होगा ही उसे हम नहीं रोक सकते।''  दूसरे दिन तीनों मिलते हैं और तय करते हैं कुछ भी हो हम पेड़ यहाँ से नहीं हटाने देंगे।  तीनों कॉलोनी के बाक़ी बच्चों से बात करते हैं, उन्हें पर्यावरण संरक्षण में पेड़ों का महत्व समझाते  हैं, उनकी बात समझकर कॉलोनी के बाक़ी बच्चे भी उनके साथ हो जाते हैं। अगले दिन एक ट्रक और ट्रॉली में कंस्ट्रक्शन वर्क के लिए रेत, ईंट,  सीमेंट, लोहा आदि सामान आता है,  सभी बच्चे ट्रक के आगे आकर खड़े हो जाते हैं वो कहते हैं ''हम यहाँ कुछ नहीं होने देंगे'' बच्चों की हिम्मत देखकर कॉलोनी के कुछ बड़े लोग भी उनके साथ आ जाते हैं और विरोध करना शुरू कर देते हैं, बच्चों के साथ बड़ों को देखकर ट्रक में सामान लाने वाले लोग घबरा जाते हैं, वो अधिकारीयों को इस बारे में फ़ोन करके बताते हैं, कुछ अधिकारी वहां पहुंचकर सबको समझने की कोशिश करते हैं, लेकिन बच्चे ज़िद पर अड़े हैं, वो किसी भी क़ीमत पर पेड़ को नहीं हटाने देंगे।  विरोध देखकर अधिकारी अगले दिन पुलिस के साथ आने की बात कहकर लोट जाते हैं।

अगले दिन कुछ वरिष्ठ अधिकारी आते हैं उनके साथ कुछ स्थानीय नेता भी हैं वो कॉलोनी के लोगों से कहते हैं ''ये सरकारी मामला हैं आप लोगों को इसमें नहीं उलझना चाहिए, अगर ऐसा करेंगे तो सरकारी काम में रुकावट डालने का केस भी बन सकता हैं, आप बच्चों को समझाइये और हमें अपना काम करने दीजिये 2 दिन बाद पेड़ की शिफ्टिंग होना है, पहले ही काम लेट हो चूका है, अगर आप लोग विरोध करेंगे तो हमें सबके खिलाफ क़ानून कार्यवाही करनी होगी, '' इतना कहकर चले जाते हैं। कॉलोनी के कुछ लोग बच्चों को समझाते हैं लेकिन बच्चों के इरादे बुलंद हैं, वो किसी भी तरह झुकने को तैयार नहीं होते। कॉलोनी के बुज़ुर्ग शर्मा जी बच्चों के साथ हैं, कॉलोनी के सभी बच्चे शर्मा जी को दादाजी कहते हैं,  शर्मा जी वन विभाग के रिटायर अधिकारी हैं, वो खुद पर्यावरण प्रेमी हैं,  उनके साथ और भी कई लोग बच्चों के साथ हैं।  शर्मा जी बच्चों को बुलाते हैं और कहते हैं ''2 दिन बाद पेड़ की शिफ्टिंग होना है, हो सकता है शिफ़्टिंग के वक़्त अधिकारी अपने साथ पुलिस बल लेकर आएं ऐसे में हमारे साथ ज़्यादा लोगों का होना ज़रूरी हैं तभी हम विरोध करके रोक सकेंगे, हमारे पास 2 दिन का वक़्त है, हमें  से ज़्यादा लोगों को अपने साथ लाना होगा।'' सोनू कहता है ''दादाजी हम और लोगों को अपने साथ कैसे जोड़े ? जब से अधिकारीयों ने पुलिस की बात कही है जो लोग हमारे साथ थे उनमे से कुछ लोग अब हमारे साथ नहीं हैं'' इतना कहकर सोनू उदास होकर बाक़ी बच्चों की तरफ देखता है।  तभी राहुल बोलता है ''दादाजी हम एक काम कर सकते हैं, हम सोशल मीडिया पर लोगों से हमारे साथ आने की अपील कर सकते हैं हो सकता है लोग हमारी बात समझकर हमारा साथ दें '' सभी को राहुल का आईडिया पसंद आता है और सोशल मीडिया पर ''SAVE TREE'' नाम से अभियान शुरू हो जाता है।  फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप और अन्य माध्यम से लोगों को इसके बारे में जानकारी दी जाती है, और 2 दिन बाद कॉलोनी के मैदान में उनके अभियान के समर्थन आने की अपील की जाती है।  बच्चों के अभियान को लोगों का खूब समर्थन मिलता है, दूसरे दिन से ही लोग वहां आना शुरू कर देते हैं।

पूरे शहर में बच्चों के SAVE  TREE  अभियान की चर्चा हो  रही  है।  मीडिया भी इस अभियान को कवरेज दे रहा है।  2 दिन बाद सुबह से ही बड़ी तादाद में लोग हाथों में पर्यावरण संरक्षण के नारे लिखी तख्तियां लेकर कॉलोनी के ग्राउंड में इकठ्ठे हो रहे हैं, इतने लोगों का समर्थन देखकर कॉलोनी के बाक़ी लोगों की हिम्मत भी बढ़ गई है अब पूरी कॉलोनी के लोग बच्चों के अभियान में शामिल हैं।  सोनू, नीता और राहुल तीनों से इस अभियान को शुरू किया था आज बड़ी तादाद में लोग उनके साथ हैं ये देखकर वो बहुत उत्साहित हैं।

थोड़ी देर में पेड़ की शिफ्टिंग के लिए अधिकारी और कर्मचारी क्रेन, ट्रक  और अन्य सामान के साथ कॉलोनी पहुँच जाते हैं, उनके साथ पुलिस भी है, लेकिन  इतनी बड़ी तादाद में लोगों को देखते हैं तो घबरा जाते हैं।  वो सबको समझने की कोशिश करते हैं, लेकिन कोई  उनकी बात नहीं सुनता सभी उन्हें वापस लोटने के लिए कहते हैं।  थोड़ी देर में और पुलिस आ जाती है लेकिन लोग उन्हें आगे बढ़ने नहीं देते, बच्चों के साथ  सभी लोग लगातार पर्यावरण संरक्षण के नारे लगा रहे हैं।  धीरे धीरे शहर से और लोग अभियान के समर्थन में जमा होने लगते हैं। मीडिया द्वारा भी इस अभियान का लाइव टेलीकास्ट किया जा रहा है, धीरे धीरे खबर पूरे देश में फैल जाती है, पूरे देश में सोशल मीडिया से लेकर न्यूज़ चैनल के स्टूडियो में बच्चों द्वारा शुरू किये अभियान पर चर्चा शुरू हो जाती है।  देश में अलग अलग शहरों में लोग इस अभियान के समर्थन में सड़कों पर आकर प्रदर्शन करने लगते हैं।

अधिकारियों  को लगता है की अब वो लोगों को काबू नही कर पाएंगे।  पूरी स्थिति से मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया जाता है। बात बढ़ती देख मुख्यमंत्री खुद वरिष्ठ अधिकारियों  के साथ वहां पहुँच जाते हैं।  मुख्यमंत्री बच्चों से बात करते हैं बच्चे उन्हें सारी बात बताते हैं।  मुख्यमंत्री बच्चों की पर्यावरण सरंक्षण के प्रति जागरूकता और हिम्मत हौसला देखकर उनकी प्रशंसा करते हैं और घोषणा करते हैं की पेड़ को यहाँ से नहीं हटाया जायेगा, जोन ऑफिस के लिए कोई और जगह चयनित की जाएगी, इस जगह पर बच्चों के लिए एक पार्क का निर्माण किया जायेगा और सोनू, नीता और राहुल को पर्यावरण संरक्षण की प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए तीनों को विशेष पुरस्कार देने की घोषणा करते हैं।  मुख्यमंत्री की बात सुनकर लोगों में ख़ुशी को लहर दौड़ जाती है।  सोनू, नीता और राहुल बहुत खुश हैं आखिर उन्होंने अपनी हिम्मत और हौसले से अपने प्यारे नी के पेड़ को हटाने से बचा लिया है और लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक भी किया है।
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लेखक : शहाब ख़ान  'सिफ़र'

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